अ स्थाई हूँ मै !!

Posted on: July 25th, 2012 by पराशर गौर 8 Comments
अ स्थाई हूँ मै !! मेरा गाँव
अभी वही है
वे चोराहे  ,वो पगडंडिया
वो खेत  अभी भी वही है !
वो चशनाले, वो पर्वत
वो चोटी पर बना मंदिर
मंदिर  के अंदर रखी वो मूर्ति
अभी भी वही है !
सब कुछ तो वही ही है
अगर नहीं हूँ तो- मै !
मै ,
नियति के हाथो की कठपुतली  बनकर
फिर रहा हूँ  इधर से उधर
उनकी तरह स्थाई नहीं हूँ
अस्थाई हूँ मै !
लेकिन,
जब मै मरुंगा  तब
मेरी राख को , मेरे गाऊ के खेतौ में
उसकी माटि के साथ  मिला दे
बस
उस दिन मै आस्थाई  हो जाउंगा !पराशर गौर !

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  • anupama tripathi

    bhavporna rachna …!!
    shubhkamnayen …!!

  • alka sarwat mishra

    बेहतर भावनाएं दर्शायीं हैं आपने इस कविता में

  • Sanjay Mishra ‘Habib’

    भावपूर्ण रचना…

    सादर।

  • vandana gupta

    bahut gahan bhav

  • creativemanch

    Bhaavpurn prastuti.
    apni maati hi bas apni hotii hai…
    स्वतंत्रता दिवस की बधाई

  • Rakesh Kumar

    सुन्दर प्रस्तुति.
    शरीर स्थाई नही,
    पर असल मैं ‘स्थाई’ है जी.

  • http://profiles.google.com/asha.saxena88 Asha Saxena

    बहुत गहरे भाव लिए कविता |
    आशा

  • Sriprakash Dimri

    बेहद भाव पूर्ण ..अपनी माटी से जुड़े रहने का मार्मिक भाव…एक अनुराग
    अन्तःस्थल को स्पर्स करती अभिव्यक्ति